
...अंकल के साथ हो रही धक्का-मुक्की और गालियों की बौछार सुनते ही आंटी घर से बाहर निकली तो एक रिपोर्टर ने उन्हें ऐसा धक्का मारा कि दीवार में जाकर वो टकरा गई। अंकल-आंटी ने रिपोर्टर्स को गुंडा समझा और पुलिस को बुला लिया। बाहर खीजते रिपोर्टर्स को जब कुछ नहीं सूझा तो उन्होंने ओबी (लाइव के लिए इस्तेमाल की जाने वाली वैन) के उस तार को ही काट डाला, जिससे उस चैनल पर लाइव चल रहा था...हाल ही में सुप्रीम कोर्ट से एक खबर आई कि आरूषि-हेमराज हत्याकांड की रिपोर्टिग से मीडिया को सबक लेना चाहिए। लेकिन क्या क्राइम रिपोर्टर या फिर न्यूज चैनल के लोग मानेंगे? बहस बहुत लंबी है और तकरीबन डेढ़ साल से चली आ रही है। जबसे 16 मई 2008 को आरूषि तलवार का बेरहमी से कत्ल किया गया था और अगले दिन सुबह शक किए जाने वाले नौकर हेमराज की भी लाश एल-32, जलवायु विहार, नोएडा से मिली थी। सभी न्यूज चैनल और अखबारवालों ने अपने अपने तरह से कयास लगाए।

नोट-
1. ये लेख सत्य घटनाओं पर आधारित है।
2. कोई भी पात्र काल्पनिक नहीं है।
3. गालियों की जगह बीप बीप का इस्तेमाल किया गया है।
तारीख थी 16 मई 2008… सुबह करीब साढ़े 8 बजे थे। आरूषि की हत्या की खबर मिलते ही लगभग सारे न्यूज चैनल के रिपोर्टर और स्ट्रिंगर्स एल-32 जलवायु विहार पंहुच चुके थे। तत्कालीन एसपी बहुत जल्दी नतीजे पर पंहुच गए और नौकर हेमराज, जो कि वारदात वाली सुबह से गायब था, उसके ऊपर ईनाम घोषित करके उसे ही कातिल करार दे चुके थे। आरूषि की लाश पोस्टमॉर्टम के लिए पंहुच चुकी थी। पिता राजेश तलवार और नूपुर तलवार स्तब्ध थे। आंखो में आंसू तो नहीं था लेकिन उन्हें देखकर अंदाजा लगाया जा सकता था कि उनके समझ में कुछ नहीं आ रहा था।

यही से मीडिया का तुक्का लगाना शुरू हुआ। चूंकि एसपी ने बाइट में ये कह दिया था कि तलवार के मकान में लूटपाट नहीं हुई थी लिहाजा लाइव चैट करने वाले रिपोर्टर्स अंदाजा लगा रहे थे कि क्या आरूषि के साथ बलात्कार हुआ... कही घर के नौकर ने मालिक से किसी बात का बदला लेने के लिए तो मासूम बच्ची की हत्या नहीं कर दी है। छेडछाड़ हुई या वो ऐसा कौन सा राज जानती थी जिसकी वजह से उसे रास्ते से हटाने के लिए हेमराज ने कत्ल कर डाला ... वगैरा-वगैरा।
सीन नंबर 1- पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से पहले ही बलात्कार का दावा
उस वक्त मैं मौका ए वारदात पर नहीं थी बल्कि ये सब टीवी पर देख रही थी। टीवी पर इसलिए क्योकिं पिछली रात (यानि 15 मई 2008) को ही मैं जयपुर ब्लास्ट कवर करके लौटी थी। बाहर की कवरेज करके लौटी थी और जयपुर ब्लास्ट की अच्छी कवरेज करने की वजह से बास से तारीफ भी मिल चुकी थी...

मैने सोचा, अजीब आदमी हैं... अभी लाश पोस्टमॉर्टम के लिए गई ही है। जबतक पीएम नहीं हो जाता, कोई नहीं बता सकता। “नहीं नहीं बॉस बहुत गुस्से में हैं एक तो ब्रेकिंग देर से हुई है... नलिनी पता लगा के बताओ... जल्दी।”
गुस्सा तो बहुत आया लेकिन फिर भी मैने तत्कालीन एसएसपी से बात की। उन्होनें बलात्कार की बात से साफ इंकार कर दिया। आरूषि की लाश पर लगी चोटों के बारे में कहा कि अक्सर अपने को बचाव करते वक्त ऐसी चोटें लग जाती है।
मैने ऑफिस में एसएसपी का वर्जन बता दिया। लेकिन असाइनमेंट और बॉस लोगों को यही लगता रहा कि दूसरे चैनल सही चला रहे हैं। लिहाजा ब्रेकिगं में आरूषि के बलात्कार की आशंका ही चली। मैं उस वक्त और हैरान हो गई जब मैने एक सहयोगी का फोनों सुना। ऐसा लग रहा था कि आरूषि का पोस्टमॉर्टम करने वाला डॉक्टर वही हो। अपने फोनों में उन्होने आरूषि के अंदरूनी और बाहरी दोनों ही चोटों के बारे में खुलासा कर डाला था। बताओ पोस्टमॉर्टम अभी हो ही रहा है... बलात्कार की आशंका।
सीन 2- अरे भाई दीपक चौरसिया स्पॉट पर हैं
अगले दिन (17 मई) सुबह ही पता चल गया कि आरूषि का हत्यारा समझे जाने वाले हेमराज की लाश भी पुलिस ने बरामद कर ली है। मानों चैनल में भूकंप आ गया। खबर लगातार बड़ी हो रही थी...मुझे भी छुट्टी कैंसिल करके आफिस पंहुचना पड़ा। चाहे जरूरत हो या ना हो हर चैनल के 2-3 रिपोर्टर्स (बाद के दिनों में ये संख्या 5-6 तक पहुंच गई थी) एक साथ जलवायु विहार पंहुच चुके थे। सब के सब केस के स्कूप ढूंढ रहे थे।

तभी न्यूज चैनल की जानी मानी शख्सियत दीपक चौरसिया स्पॉट पर नजर आए। अगर ब्लास्ट को छोड़ दिया जाए तो काफी सालों बाद दीपक जी को एक क्राइम की खबर पर देखा जा रहा था। अब बाकी के रिपोर्टर्स की हालत खराब। एक ने फटाफट ऑफिस में फोन लगाया.... “अरे भाई किसी और धुरंधर रिपोर्टर को भेजो, मेरे से तो नहीं संभल रहा है, कितना कुछ है करने को ... पता है दीपक चौरसिया खुद है... (बीप बीप) कहीं कुछ गड़बड़ हो गया तो सब हमारे माथे पर फूटेगा। थोड़ी ही देर में एक दूसरे चैनल के एक्जीक्यूटिव एडिटर नजर आने लगे। धीरे-धीरे करके सभी चैनल्स के सर्वेसर्वा जलवायु विहार ‘टहलने’ के लिये पहुंचने लगे। आनन फानन में आरूषि के माता पिता अगले ही दिन आरूषि का अस्थि-विसर्जन करने हरिद्वार पंहुच गए... ये बात किसी के गले नही उतर रही थी। लिहाजा इस बात पर तो कयास लगाए ही जा रहे थे कि क्यों तलवार परिवार ने इतनी जल्दबाजी की। अबतक पुलिस ने आरूषि की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का खुलासा कर दिया था और बात साफ साफ बता दी थी आरूषि के साथ कोई बलात्कार जैसी बात नहीं है और आरूषि की हत्या धारदार हथियार से देर रात को की गई है।
तमाम चैनल के रिपोर्टर्स गुटखा खाने और सिगरेट पीने में गप्पबाजी ही कर रहे थे कि एक जाने माने सीनियर क्राइम रिपोर्टर ने आरूषि के घर से छत तक की “17 सीढियों” को भी गिन डाला। एक वॉकथ्रू के जरिए पुलिसिया तफ्तीश पर भी सवालिया निशान लगा डाले। बस फिर क्या था जैसे ही वो वॉकथ्रू चला, सब चैनलों में हंगामा हो गया। अधिकतर रिपोर्टर सीढ़ी पर नजर आ रहे थे... धक्का मुक्की... गाली गलौच के बीच लगभग सारे चैनल के लोगों ने एक एक वॉकथ्रू किया।
सीन नंबर 3- बुजुर्गों में दहशत
जैसा कि मैने आपको पहले बताया कि बड़ी खबर होने के नाते एक चैनल के 5-6 रिपोर्टर जलवायु विहार में रहते थे।

सीन नंबर 4---रांग नंबर
इस बीच मेरे एक सहयोगी ने आरूषि के पिता राजेश तलवार, आरूषि और नूपुर तलवार की मोबाइल डिटेल निकाल ली थी। जिस रात हत्या हुई थी उसकी सुबह एक लैंडलाइन फोन से आरूषि के मोबाइल पर फोन आया और कुछ सेकेंड के बाद डिसकनेक्ट हो गया। एक वरिष्ठ सहयोगी ने जल्द ही खुलासा कर दिया किया कि वो नंबर नोएडा के ही एक डेयरी के पास से आया है। आनन फानन में चैनल में एक्सक्लूसिव बैंड के साथ बड़ी बड़ी ब्रेकिंग चलानी शुरू हुई... कि आखिर किसने किया आरूषि के मोबाइल पर फोन.... वही कातिल तो नहीं था.... क्या जानना चाहता था वो कातिल।

सीन 5- अफवाहों का दौर
चौबीसों घंटे रिपोर्टर आरूषि के घर पर गिद्ध जैसी नजर गड़ाए रहते थे। अब कवरेज करते करीब एक हफ्ते से ज्यादा हो चुके थे लिहाजा आसपास के लोगों से भी रिपोर्टर जान पहचान बना चुके थे। जिस चैनल के रिपोर्टर-कैमरामैन के लिए उनके ऑफिसवाले खाना और पानी भिजवा देते थे... उनके लिए कोई दिक्कत नहीं थी। लेकिन जिनके ऑफिस से नहीं आता था उनमें से कुछ रिपोर्टर्स को आरुषि के पड़ोसी खाना पानी दे देते थे। पड़ोसी भी रिपोर्टर को कुछ खिलाने के एवज में रिपोर्टर्स से अंदर की बात निकलवा लेते थे। लेकिन ये अंदर की बात कम और अफवाहे ज्यादा होती थी। पड़ोसी भी अफवाहों का दौर गर्म करके रखते थे।
सीन 6-पान का पीक या खून का धब्बा
अबतक नोएडा पुलिस को ना तो आला-ए-कत्ल (हत्या में इस्तेमाल किया गया हथियार) मिला था और ना ही कोई सुराग। ये शायद पहला मौका था जब क्राइम रिपोर्टर्स की डिक्शनरी में “आला-ए-कत्ल” शब्द का इस्तेमाल धड़ल्ले से किया जाने लगा। शक लगातार तलवार दंपत्ति पर गहराता जा रहा था। रिपोर्टस को भी स्पॉट पर कुछ ज्यादा करने को नहीं मिल रहा था। तभी सर्वश्रेष्ठ चैनल के रिपोर्टर की नजर तलवार साहब के बंद पड़े गैराज पर गई। चूंकि सब उस वक्त ‘जेस्म बॉन्ड’ बने हुए थे तो गैराज में झांक कर देखा। बस उस दिन एक शगूफा छोड़ा गया कि उस बंद गैराज में कुछ खून से सना पड़ा था। फिर क्या था नोएडा पुलिस की धज्जियां उड़नी शुरू।

सीन 7- आईजी की प्रेस कॉंन्फ्रैंस
मेरठ जोन के आईजी की प्रेस कॉन्फ्रैंस भला कोई कैसे भूल सकता है। दरअसल, आरुषि हत्याकांड़ के विवाद की जड़ यही प्रेस कॉन्फ्रैंस थी। या यूं कहे कि सारे विवाद इसी प्रेस-वार्ता के बाद से ही शुरु हुए।


सीन 8-अश्लील एमएमएस
आईजी साहब ने पीसी खत्म की नहीं कि एक चैनल (जो कुछ महीने पहले ही लांच हुआ था) ने ‘आरुषि का एमएमएस’ दिखाना शुरु कर दिया। इस एमएमएस के जरिए चैनल क्या बताना चाहता था, ये आज तक साफ नहीं हो सका है। वो, आईजी के इस बयान पर मोहर लगाना चाहता था कि वाकई मरने वाली लड़की का चरित्र ठीक नहीं था और उसके पिता ने शायद इसी वजह से पहले अपनी ही बेटी की हत्या नौकर (हेमराज) के हाथों करवा डाली—और फिर खुद नौकर को ठिकाने लगा दिया। या ये कि, इस एमएमएस का हत्याकांड से कोई नाता था। हां, ये बात जरुर है कि बाद में ये बात साफ हो गई कि एमएमएस में दिखाई जाने वाली लड़की आरुषि नहीं कोई और थी।
सीन 9-तलवार दंपत्ति की चुप्पी
इस पूरे मामले को कही ना कही खुद तलवार दंपति ने ही विवादों में डाल डाल दिया था। दरअसल, हत्या के बाद से ही तलवार दंपत्ति के साथ-साथ उनके करीबी और रिश्तेदार तक चुप्पी साधें हुए थे।

सीन 10-अनीता दुर्रानी ने सुसाइड किया
टीवी और अखबारों के पत्रकारों के साथ साथ अब पुलिस को भी यही लगने लगा कि कातिल राजेश तलवार हैं। मेरठ के आईजी ने प्रेसकॉन्फ्रेंस में केस का खुलासा भी कर दिया कि राजेश तलवार ने अनीता दुर्रानी के साथ हुए अवैध संबंधों के चक्कर में आरूषि और हेमराज को रास्ते से हटा दिया। उस दिन तो दिनभर चैनलों पर पुलिस की ही थ्योरी चलती रही। हम सभी को ऐसा लगा कि अब शायद केस खत्म हुआ लेकिन नहीं, रोज रोज नई डेवलेपमेंट होती जा रही थी। इसलिए अभी भी पत्रकारों का जमावड़ा जलवायु विहार में था। ज्यादा कुछ करने को था नहीं तो अधिकतर रिपोर्टर्स चाय की चुस्की के साथ गप्पे मार रहे थे। इसी बीच एक क्राइम रिपोर्टर ने शगूफा छोड दिया कि पुलिस की थ्योरी से गमगीन ‘अनीता दुर्रानी ने सुसाईड’ कर लिया है। ये बात सारे रिपोर्टर हंसी मजाक में कर रहे थे कि ‘सर्वश्रेष्ठ चैनल’ की एक महिला पत्रकार ने चुपचाप जाकर खबर ब्रेक कर दी कि अनीता दुर्रानी ने सुसाइड कर लिया है। चूंकि खबर बड़े चैनल पर ब्रेक हुई थी तो हम सभी के फोन घनघनाने शुरू हो गए। ऐसा ही हुआ था आरुषि-हेमराज हत्याकांड की रिपोर्टिंग के दौरान। क्या रिपोर्टर और क्या न्यूज चैनल्स...सभी ब्रैकिंग न्यूज जल्द से जल्द चलाना चाहते थे। नतीजा...अनीता दुर्रानी का सुसाइड !
सीन 11-मीडिया के गुंडे
नोएडा पुलिस की जांच पर सवालिया निशान लगाते हुए नूपुर तलवार की अर्जी पर मामले की जांच अब सीबीआई के हवाले थी। सीबीआई ने नूपुर तलवार के कंपाउंडर कृष्णा और अनीता दुर्रानी के नौकर राजकुमार को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की। अब जब कृष्णा पर सीबीआई ने कत्ल का शक जताया।
कृष्णा के घरवालों ने एक प्रेस कॉन्फ्रेन्स की थी। कृष्णा और उसका परिवार आरूषि के घर से महज 50 कदम की दूरी पर ही एक रिटायर्ड आर्मी ऑफिसर के घर में रहता था। प्रेस-कॉन्फ्रेन्स रिटायर्ड आर्मी अफसर के घर में ही रखी गई। सभी चैनल उस पीसी को लाइव काटना चाहते थे... लेकिन कमरा इतना छोटा था कि पॉसिबल नही था। ऐसे में एक चैनल की तेज तर्रार महिला पत्रकार अपने कैमरामैन के साथ कमरे में घुस गई और दरवाजा अंदर से बंद कर लिया। (उसकी ये मंशा थी कि सिर्फ ये पीसी एक्सक्लूसिव उसी के चैनल पर चले) बस फिर क्या था भाईलोगों को ये बात बुरी लग गई। कृष्णा के परिवार वालों का लाइव इंन्टरव्यू ज्यों ही उस अंग्रेजी चैनल पर चला...बाकी चैनल के रिपोर्टस के फोन घनघनाने शुरू हो गए। कई चैनल के बॉस लोगों ने अपने रिपोर्टर को गाली देनी शुरू कर दी... बीप....बीप... अगर अपने यहां लाइव नही चला तो नौकरी से निकाल दूंगा। बीप बीप...उस चैनल पर कैसे चल रहा है. बीप.... खा खा कर “घोरा होते जा रहे हो गधे।” अधिकतर रिपोर्टर्स की ऐसे ही क्लास लग रही थी। बस फिर क्या था। कुछ रिपोर्ट्स जिनको उनके ऑफिस से फटकार लग रही थी उन्होने कमरे के दरवाजे को धक्का देना शुरू कर दिया। अंदर बैठी महिला रिपोर्टर को धमकाना शुरू कर दिया... बीप बीप... आज तू इस कमरे से निकल कर दिखा... घर भी नहीं जा पाएगी.. बीप।

सीन 12-चैनल की वॉल पर दूसरे चैनल के रिपोर्टर
धीरे धीरे जब मीडिया की नंगई सामने आने लगी...ये कहा जाए तो ज्यादा सही रहेगा कि जब एक न्यूज चैनल ने अपनी टीआरपी के लिए दूसरे चैनल के लोगों को गलत ठहराया गया तब जाकर दूसरे चैनल वाले होश में आए। सब क्राइम रिपोर्टर्स को सभ्यता से पेश आने की हिदायद दी गई।

लेकिन कृष्णा के मकान मालिक और उसके परिवार वालों से बदसलूकी के बाद भी कुछ रिपोर्टर्स और उनके बॉस लोगों को शर्म नहीं आई। वो संवाददाता अपना बखान ऐसे कर रहे थे जैसे कि दूसरे चैनल का लाइव प्रसारण रोक कर कोई जंग जीत ली हो। लेकिन ये सिलसिला सिर्फ एक दिन का ही नहीं था। अगले दिन फिर मीडिया के लोगों ने ऐसा ही कुछ किया। अगले दिन फिर जब कृष्णा के घरवालों ने प्रेस कॉन्फ्रैन्स की तो नजारा फिर गाली गलौच और धक्कामुक्की वाला था। सब एक्सक्लूसिव करने में लगे थे लेकिन साथ ही ये भी खयाल था कि अगर एक का नहीं होगा तो किसी का नहीं होने देंगे। इस बार हंगामा इतना था कि जी न्यूज पर स्टार न्यूज का रिपोर्टर और आईबीएन 7 पर आजतक का रिपोर्टर दिख रहा था।
सीन 13- इंटरव्यू के लिए एसएमएस से धमकी
लगातार दो दिनों से इलैक्ट्रॉनिक मीडिया द्वारा किए जा रहे हंगामे को कुछ हिंदी अखबारों ने भी खूब जमकर फोटो सहित छापा। न्यूज चैनल्स की बदनामी होते देख लगभग सभी चैनल के बॉस लोगों ने ये संयम रखने की हिदायत दी। लेकिन साथ ही वो आरूषि केस में एक्सक्लूसिव भी चाहते थे। बार बार फोन कर कर के अपने रिपोर्ट्स को कृष्णा के परिवार को ऑफिस में लाइव के उठा लाने की बात भी करते थे। अब सैकड़ों रिपोर्टर्स के बीच कृष्णा के परिवार को एक्सक्लूसिव लाइव पर लाना संजीवनी बूटी लाने जैसा ही था।
ऐसे में (आजतक को पहली बार तीसरे नंबर पर धकेलने वाले) इस चैनल के एक क्राइम रिपोर्टर ने एक बहुत गलत तरीका अख्तियार कर लिया। उस रिपोर्टर ने कृष्णा के घरवालों को एसएमएस के जरिए इन्टरव्यू ना देने के एवज में धमकाना शुरू कर दिया। एक के बाद एक वो कृष्णा के घरवालों को धमकी भरे एसएमएस करता। लेकिन जब ये बात चैनल के अधिकारियों को पता चली तो उस रिपोर्टर को अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ा।
सीन 14-आरुषि का भूत!
चाहे दिन का उजाला हो या देर रात, रिपोर्टर 24 घंटे आरूषि के घर के सामने खडे़ रहते थे।

इस उम्मीद में कहीं सीबीआई की टीम दोबारा ना आ जाए या फिर किसी की गिरफ्तारी ना हो जाए। एक चैनल के रिपोर्टर को तो फोबिया हो गया था। वो वही गाड़ी में सोया हुआ था अचानक आरूषि आरुषि करके चिल्लाने लगा। उसके आंख बंद करते ही आरूषि उसके सपने में आती थी... ना सिर्फ आती थी बल्कि कत्ल की पूरी वारदात को रिक्रिएट करके बताती थी।
सीन 15- अपनी ढपली अपना राग
पहले नोएडा पुलिस और बाद में सीबीआई के मामले की ‘गुत्थी को सुलझाने’ के दावे के बाबजूद हर रिपोर्टर और हर चैनल कत्ल से जुड़ी थ्योरी दिखाने में तल्लीन था। कोई तलवार दंपति के पूर्व नौकर विष्णु को हत्यारा बता रहा था तो कोई वाइफ स्वैपिंग का राग अलाप रहा था। मजे की बात ये थी कि जो थ्योरी चैनल्स पर चलती थी, पुलिस और सीबीआई की तफ्तीश की दिशा भी उसी ओर घूम जाती थी। मानो पुलिस और सीबीआई भी सभी चैनल्स को 24X7 वॉच कर रही थी। किसी चैनल ने चला दिया कि आरुषि के कत्ल का वक्त रात नहीं दिन था। किसी ने प्रेस-कांफ्रेस में आईजी साहब से पूछ डाला कि आरुषि का पोस्टमार्टम दुबारा हो सकता है क्या। वो भी तब जब कि आरुषि का अंतिम-संस्कार हो चुका था।
सीन 16-खूनी पंजा
जलवायु विहार के जिस फ्लैट की छत पर नौकर हेमराज की लाश मिली थी, वहां एक खून से सने पंजे का निशान था। कयास लगाया जा रहा था कि ये किस का पंजा है---हेमराज का या फिर खूनी का।


सीन 17-सीबीआई का गूफअप
आरुषि हत्याकांड की तफ्तीश का जिम्मा जब सीबीआई को दिया गया तो लगा कि अब इंसाफ हो ही जाएगा। लेकिन सीबीआई ने तो पूरे मामले को और उलझा कर रख दिया। कभी राजेश तलवार को आरोपी बनाया, तो कभी नौकरों और कंपाउडरो को। रिपोर्टर और न्यूज चैनल भी उसी भाषा में बोलते थे जो सीबीआई बोलती थी। धीरे-धीरे सीबीआई की असलियत भी सबके सामने थी। नतीजा के डेढ़ साल बीत जाने के बाद भी देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी अंधेरे में ही हाथ-पांव मारते दिखाई दे रही है। ऐसे में जब भी सीबीआई ‘कुछ’ करती है तो वो न्यूज चैनल्स में हेडलाइन बन जाती है---कभी आरुषि का मोबाइल हाथ लगना, तो कभी तलवार दंपत्ति का नारको-टेस्ट इत्यादि-इत्यादि।
लेकिन एक बात जरुर है कि आरुषि हत्याकांड इस देश के न्यूज चैनल्स और रिपोर्टर्स के लिए एक सबक बन गया है कि अभी भी वक्त है सुधरना है तो सुधर जाओ वर्ना सुप्रीम कोर्ट का डंडा चलने में देर नहीं लगेगी।